looser ( to be continue ....)-7


 looser ( to be continue ....)-7

looser, loser, autobiography
looser 33



आज जो जिम्मेदारियां मुझ पर अचानक आयी है ,काश वो पहले से मुझ पर धीरे -धीरे डाली गयी  होती और मुझे एक स्वतन्त्र झूट दी गयी होती अपना आप को साबित करने की तो मैं  एक लूज़र न बनता।

मेरा एक दोस्त और था जिसे मैं भूल ही गया ' मनोज अग्रहरी ' सायद मैं उसे कम पसन्द  करता था उस समय  पर ,आज  कल का वो दोस्त जिसे मैं कम पसन्द करता था आज एक सफल व्यक्ति है अपनी दम पर जिसे  insurance का ' i '  नहीं पता था। वो आज  insurance का मास्टर  है। एक समय जब मैं शेयर मार्किट  की बात करता था तो वो मुझे डाट देता था की ये सब मुझे नहीं समझ आता आज वो इसे अच्छी तरह जनता है।
आज सब दोस्त दूर हो गए पर आज भी वो मेरे साथ है !

ग्रेजुएशन हम दोनों ने साथ में की वो 'सिबली कॉलेज ' में और मैं 'टी.डी. कॉलेज' जौनपुर में था।   .
 एक बार मुझे अपने कपडे किसी अच्छे टेलर से सिलाने  की इच्छा थी, जौनपुर में एक टेलर था जो काफी मशहूर था मैंने अपनी पेंट-शर्ट वहीं   जाकर दी, जब कपड़े सिल गए तो  मै ले के आ रहा था की मुझे मनोज मिल गए इसने पूंछा कितनी सिलाई पड़ी, मैंने बताया तो ये बोला  इतना ज्यादा सिलाई दी तुमने  क्या शाहगंज में कोई टेलर नहीं था, और आज वो मनोज रैडीमेड कपडे पहनता है 4000 की तो सिर्फ टाई होती है उसकी ,समय देखिये मुझे कहता था फ़िजूलखर्च  वो आज खुद उससे ज्यादा ख़र्च करता है।

इंटरमीडिएट के बाद  मुझे ग्रेजुएशन करना था, जिसमे  सब्जेक्ट मुझे 'जंतु विज्ञानं, वनस्पति विज्ञानं, रसायन विज्ञानं' चाहिए  था। जो शाहगंज में उपलब्ध नहीं थे, यहां साइंस साइड से कोई कॉलेज नहीं था, अतः  जौनपुर टी.डी. कॉलेज में इंट्रेंस का एग्ज़ाम दिया, मेरा पहली लिस्ट में नाम आ गया  पर बारिश के कारन समय पर न पहुंच पाया जब कॉलेज पहुंचा तब तक 4th लिस्ट निकल चुकी थी  मेरे एडमिशन में बहुत समस्या हो रही थी भैया मेरे बहुत परेशांन  थे  वो ही लेकर मुझे जौनपुर  जाते थे, भैया ने छात्र नेता से बात कि वो मदद के लिए तैयार हो गए उनके कहने पर प्रिंसिपल एडमिशन के लिए तैयार हो गए, पर वो रसायन विज्ञानं की जगह पर मुझे मिलिट्री साइंस सब्जेक्ट दे रहे थे। तब मेरे पापा मेरे साथ गए और प्रिंसिपल से बात की तब जाकर उन्होंने मुझे 'रसायन विज्ञानं' सब्जेक्ट  दिया।

रोज भैया मुझे जौनपुर की बस पर बैठाते और शाम को बस पर लेने आते। मैं सिर्फ  जौनपुर में  घूम सकता था वो भी कॉलेज तक लेकिन दोस्तों के साथ थोड़ा-बहुत जौनपुर घूमा मैंने। शुरुआत में अकेले बस में जौनपुर जाने  में भी डर लगता था। सभी लड़के ट्रेन से कॉलेज जाते थे, पर स्टेशन से टी.डी.कॉलेज दूर था, और बस अड्डे  से पास इसीलिए भैया मुझे बस से कहते थे जाने को।
बस से जाने पर मेरा वनस्पति विज्ञानं का प्रैक्टिकल कभी-कभी छूट जाता था क्यूंकि कभी -कभी बस लेट हो जाती थी।

 13 तारीख को मैं पैदा हुआ 13 तारीख मेरे लिए शुभ है ऐसा मुझे लगता है पर ये कितना सच है मैं  भी नहीं जनता।

कहानी के पिछले भाग :--
1- LOOSER-1
2- LOOSER-2
3- LOOSER-3
4- LOOSER-4
5- LOOSER-5
6- LOOSER-6


story to be continue ...... 

Amit Bhardwaj

Hello ! I am Amit bhardwaj I am Post graduate(MSc.) & very ambitious person . I am a new blogger, I have started my blogging career from July 2019."The world is not what we see, the world is what we show" I hope people will like my effort. Through my blog people will get information.- “that’s my rewords”- thank you !.

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