looser ( to be continue ....)-8

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looser 33


जब आप 'आत्मकथा' लिख रहे होते है, तो आपकी सारी  कहानी एक फिल्म  की  तरह आपके ज़ेहन  में चलती है। लगता है जैसे कल की बात हो,                       

                                                 ''एका बार  फिर से जी ली जिंदगी मैने ,
                                                    गुजर गयी थी जो कभी यादों में। ''
                               
मैंने साइंस साइड खास तौर से  ''प्रैक्टिकल ''के लिए ली थी। मुझे विच्छेदन(dissection) करना काफी पसंद था।  जन्तु विज्ञानं लैब में मैंने शॉर्क का नर्वस सिस्टम, गिलहरी का अन्तः स्रावी ग्रन्थि (endocrine gland), मेढक का कंठिका उपकरण (hyoid apparatus), स्नेल तथा सीप का नर्वस सिस्टम निकाला जो मुझे  काफी अच्छा लगा। मैंने अपने ब्लड से क्लॉटिंग टाइम ब्लड का और हैमेन क्रिस्टल (haymen  crystal ) भी निकाला।

पहली बार अपना ब्लड निकालते समय काफी डर लग था ,  मैंने टीचर  कहा सर मुझे अपने आप निडल उंगली में घुसा कर ब्लड निकालने में डर लग रहा है , please आप निकल दो, उन्होंने बड़े ध्यान से निडल उंगली में चुभा कर ब्लड निकाल दिया दिया, तब तक मैंने अपनी आँखे बंद कर रखीं थी, उन्होंने कहा काफी पतला खून है तुम्हारा। तब जाकर मैंने ब्लड  का क्लॉटिंग टाइम निकाला, जिसे देखकर टीचर काफी  खुस हुए क्यूंकि उन्होंने जैसे बताया था, वैसे ही मैंने किया था, मेरा प्रैक्टिकल अच्छा हुआ  था।

पहली बार जब मैंने स्नेल तथा सीप का नर्वस सिस्टम निकाला तो उसकी बदबू इतनी खराब थी, की 3 दिन तक मुझे ठीक से खाना नहीं खाया जाता था, उसकी बदबू जैसे नाक में बैठ गयी थी।

 शार्क के  विच्छेदन(dissection) के समय टीचर ने कहा  इसका नर्वस सिस्टम निकालना  है, काफी देर तक  टिश्यू ट्रेस किये जब आसानी से नासे  बाहर नहीं आ रही थी तो, मैंने उसे दाब कर  टेढ़ा किया उसकी सारी  नासे बाहर   आ गयी, टीचर को दिखाया, टीचर बोले ''साबास  बेटा सरे क्लास को दिखाया और कहा इसने बहुत अच्छा किया है, सभी लोग इसी तरह से करेंगे। मुझे काफी अच्छा लगा।

एक बार वनस्पति विज्ञानं की लैब में किसी पौधे का L.S.  सेक्शन काट रहा था  तभी टीचर आ गये  मेरे आगे के बाल लम्बे  थे  और आगे लटक रहे थे मुझे पता भी नहीं चला कब उन्होंने मेरे बाल जो लटक रहा थे  उसे ठीक किया औय मेरे मुँह से ''THANK YOU'' निकल गया उन्होंने घूर कर मुझे देखा 'फिर आगे बढ़ गए।

जंतु विज्ञानं के वायवा  "(viva-voce )'' के समय पता नहीं चलता था की कैसे प्रश्न पूंछे जायेंगे '।

मैं viva के लिया गया उन्होंने पहले यही पूंछ  लिया की  इन्हे जानते हो  उनके पड़ोस में एक टीचर और बैठे थे , मैंने बोल दिया नहीं, वो वनस्पति विज्ञानं में मेरे सेक्शन में पढ़ाते थे  चूँकि मैं सुभह लेट हो जाता था इसलिए  क्लास मिस हो  जाती थी और मैंने उन्हें कभी नहीं देखा था, टीचर जो viva  ले रहे थे उन्होंने कहा  ''इसने तो आपकी नौकरी ले ली इसके अनुशार आप तो कॉलेज में पढ़ाते भी नहीं है और हैं भी नहीं '' वो हॅसने लगे , तब मैंने उन्हें बताया बस लेट होने कारण मैं  उनकी क्लॉस अटेंड नहीं कर पा रहा था, 8 -10  प्रश्न पूंछे गए मैंने एक छोड़ कर बाक़ी सही उत्तर बताया  मेरा viva  ठीक हुआ पर मुझे डर था कहीं viva में फेल न कर दे पर उन्होंने ऐसा नहीं किया मुझे  viva में अच्छे no. मिले।



कहानी के पिछले भाग :--
1- LOOSER-1
2- LOOSER-2
3- LOOSER-3
4- LOOSER-4
5- LOOSER-5
6- LOOSER-6
7- LOOSER-7




story to be continue ...... 

Amit Bhardwaj

Hello ! I am Amit bhardwaj I am Post graduate(MSc.) & very ambitious person . I am a new blogger, I have started my blogging career from July 2019."The world is not what we see, the world is what we show" I hope people will like my effort. Through my blog people will get information.- “that’s my rewords”- thank you !.

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