स्वामी विवेकानंद जी के 40 अनमोल वचन :--
स्वामी विवेकानंद जी एक अद्यात्मिक गुरु व समाज सुधारक थे। स्वामी विवेकानंद ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकांड जैसे समाज मे चल रही विसंगतियों
को दूर करने का प्रयास किया। वे हमेशा से
युवाओ के प्रेरणास्रोत रहे है। इस लेख के माध्यम से हम स्वामी विवेकानंद
जी के अनमोल कथनों को प्रस्तुत करेंगे। जो हमारे जीवन मे प्रेरणादायक रहेंगे।
स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 कलकत्ता मे हुआ था। इनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। स्वामी विवेकानंद नाम इन्हें गुरु
रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। अमेरिका के शिकागो मे आयोजित विश्वधर्म धर्म सम्मलेन
मे स्वामी विवेकानंद जी ने भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। इन्होने समाज के सेवाकार्य के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।
स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल कथन :--
1- उठो, जागो, और तब तक मत रुको
जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये।
2- एक समय आता है, जब मनुष्य अनुभव करता है कि थोड़ी से मनुष्य की
सेवा करना लाखो जप-ध्यान से कहीं बढ़ कर है।
3- एक विचार लो, उस विचार को अपना जीवन बना लो, उसके बारे मे
सोचो, उसके सपने दखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिस्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के
हर हिस्से को उस विचार मे डूब जाने दो, और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो। यही
सफल होने का तरीका है।
4- जिस समय पर आप जिस काम को करने की प्रतिज्ञा करते हैं उसे
उसी समय पर पूरा कीजिये अन्यथा लोगो का विश्वास उठ जायेगा।
5- बाहरी स्वभाव केवल अंदरूनी स्वभाव का बड़ा रूप है।
6- सत्य को हजार तरीको से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य
ही रहेगा।
7- दिल और दिमाग के टकराव मे दिल की सुनो।
8- सबसे बड़ा पाप है, खुद को कमजोर समझना।
9- जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है- शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक
उसे जहर की तरह त्याग दें।
10- विश्व एक विशाल व्यायामशाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने
के लिए आते हैं।
11- ब्रम्हाण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही
हैं जो अपनी आँखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
12- हम जो बोते है वही काटते हैं। हम स्वयं अपने भाग्य के
निर्माता हैं।
13- किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह, गिरो तो एक
बीज की तरह, ताकि दुबारा उगकर उसी मकसद के लिए फिर से जंग कर सको।
14- जितना कठिन संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।
15- “जब तक जीना, तब तक सीखना “_अनुभव ही जगत मे सर्वश्रेष्ठ
शिक्षक है।
16- महान कार्य महान त्याग से ही सम्पन्न हो सकता है।
17- डर कमजोरी की सबसे बड़ी निशानी है। महान कार्य के लिए महान
त्याग करने पड़ते हैं। खुद को कमजोर मान लेना बहुत बड़ा पाप है। आत्मा के लिए कुछ भी
असंभव नहीं है।
18- जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर भी
विश्वास नहीं कर सकते।
19- यदि स्वयं मे विश्वास करना और अधिक विस्तार से पढाया और
अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है की बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा
हिस्सा गायब हो गया होता।
20- हजारों ठोकरे खाने के बाद ही एक अच्छे चरित्र का निर्माण
होता हैं।
21- नए विचारो को जन्म देने के लिए चिंतन करो, चिंता कभी भी मत
करो।
22- जो सत्य है, उसे साहस पूर्वक निर्भीक होकर लोगो से कहो
उससे किसी को कष्ट होता है या नहीं, इस ओर ध्यान मत दो। दुर्बलता को कभी सहारा मत
दो।
23- संभव की सीमा को जानने का सबसे सही तरीका है, असंभव की
सीमा से आगे निकल जाना।
24- किसी दिन जब आपके सामने कोई समस्या न आये तो आप सुनिश्चित
हो सकते है कि आप गलत रस्ते पर चल रहे है।
25- जो आग हमें गर्मी देती है, वो हमें नष्ट भी कर सकती है, यह
आग का दोष नहीं है।
26- सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि वह पुरुष
या स्त्री जो बदले मे कुछ नहीं मांगता। पूर्ण रूप से निस्वार्थ व्यक्ति सबसे सफल
है।
27- विश्व मे अधिकांश लोग इस लिए असफल हो जाते हैं, क्योकि उनमे
समय पर साहस का संचार नहीं हो पता। वे भयभीत हो जाते है इस कारण वो किसी कार्य को
नहीं कर पाते।
28- हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इस लिए इस बात
का ध्यान रखिये की आप क्या सोचते हैं। अगर आपके पास विचार रहते है तो आप दूर तक
यात्रा कर सकते हैं।
29- तुम मुझे पसंद करो या मुझ से नफरत करो, तो दोनों ही मेरे
पक्ष मे है .अगर तुम मुझको पसन्द करते हो तो, मै आपके दिल मे हूँ, और अगर तुम
मुझसे नफरत करते हो, तो मै आपके मन मे हूँ।
30- जैसा तुम सोचते हो ,वैसे ही बन जाओगे। खुद को कमजोर मानोगे तो
कमजोर और मजबूत मानोगे तो मजबूत ही बन जाओगे।
31- कुछ मत पूछो, बदले मे कुछ मत मागो। जो देना है वो दे दो, वो
तुम तक वापस आएगा, पर उसके बारे मे अभी मत सोचो।
32- किसी की निंदा न करे। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते है तो
जरूर बढ़ाये। अगर नहीं बढ़ा सकते तो अपने हाथ जोडिए, अपने लोगो को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके मार्ग पर जाने दीजिये।
33- राम-राम करने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। जो प्रभु की
इच्छा अनुसार कार्य करता है वही धार्मिक है।
34- ज्ञान का प्रकाश सभी अंधेरो को ख़त्म कर देता है।
35- सभी को मरना है, सज्जन भी मरेंगे, दुर्जन भी मरेंगे, गरीब
भी मरेंगे, अमीर भी मरेंगे, इसलिए निष्कपट होकर जीवन जियो।
36- कमजोरी सभी बंधन मात्र कल्पना है। कमजोर कभी न
पड़े, मजबूती के साथ खड़े हो जाओ। शक्तिशाली बनो ! मै जनता हूँ सभी
धर्म यही कहते हैं। कभी कमजोर न पड़े आप अपने आप को शक्तिशाली बनाओ। आप के भीतर
अनंत शक्ति है /
37- जब लोग तुम्हे गाली दे, तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे
झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।
38- क्या तुम नहीं अनुभव करते की दूसरो के ऊपर निर्भर रहना
बुद्धिमानी नहीं है। बुद्धिमान व्यक्ति को अपने ही पैरो पर दृढता पूर्वक खड़ा होकर
कार्य करना चाहिए। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जायेगा।
39- यही दुनिया है, यदि तुम किसी का उपकार करो, तो लोग उसे कोई
महत्त्व नहीं देंगे। किन्तु जो ही तुम उस कार्य को बंद कर दोगे तो वो तुरंत तुम्हे
बदमाश प्रमाणित करने मे नहीं हिचकिचायेंगें। सभी भावुक व्यक्ति अपने सगे –स्नेहियो
द्वारा ठगे जाते हैं।
40- पूरी निष्ठा और लगन से एक समय मे एक ही काम करो बाकी सब कुछ
भूल जाओ।
स्वामी विवेकानंद जी के इन अनमोल विचारो को अपने जीवन मे
प्रयोग करे। स्वामी विवेकानंद जी को ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यानों तथा उनके
सिद्धांतो की ख्याति पुरे संसार मे है।
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